धर्म से-लाभ और अधर्म से हानि (Dharm Se Labh aur adharm se hani)

धर्म से-लाभ और अधर्म से हानि (Dharm Se Labh aur adharm se hani)
₹15.00
Book Code: 0253
अलग-अलग सात भागों तथा विभिन्न शीर्षकों की तेरह पुस्तकों में पूर्व प्रकाशित सरल एवं व्यावहारिक शिक्षाप्रद लेखों के इस ग्रन्थाकार संकलन में गीता-रामायण आदि ग्रन्थों के सार तत्त्वों का संग्रह है। इसके अध्ययन से साधन-सम्बन्धी सभी जिज्ञासाओं का सहज ही समाधान हो जाता है।
Description

Details

अलग-अलग सात भागों तथा विभिन्न शीर्षकों की तेरह पुस्तकों में पूर्व प्रकाशित सरल एवं व्यावहारिक शिक्षाप्रद लेखों के इस ग्रन्थाकार संकलन में गीता-रामायण आदि ग्रन्थों के सार तत्त्वों का संग्रह है। इसके अध्ययन से साधन-सम्बन्धी सभी जिज्ञासाओं का सहज ही समाधान हो जाता है। यह प्रत्येक घर में अवश्य रखने एवं उपहार में देने योग्य एक कल्याणकारी ग्रन्थ है।
Additional Information

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Book Code 0253
Pages 192
Language हिन्दी, Hindi
Author जयदयाल गोयन्दका
Size (cms.) No