श्रीराधामाधव चिन्तन (Shriradha Madhav Chintan)

श्रीराधामाधव चिन्तन (Shriradha Madhav Chintan)
₹90.00
Book Code: 0049
इसमें श्री राधाकृष्ण का अलौकिक प्रेम ही श्रीराधामाधव-चिन्तनके रूप में प्रस्फुटित है। भक्ति और शास्त्रीय चिन्तन के अद्भुत समन्वय के साथ यह ग्रन्थ-रत्न सात प्रकरणों में विभक्त है। श्रीराधा, श्रीकृष्ण, श्रीराधामाधव, भावराज्य-लीला-रहस्य, प्रेम-तत्त्व, गोपाङ्गना और प्रकीर्ण-ये सातों प्रकरण मुक्ति के सप्त सोपान के रूप में भगवत्-तत्त्वका सरस, हृदयग्राही प्रतिपादन करते हैं।
Description

Details

नित्यलीलालीन (भाईजी) श्री हनुमानप्रसाद जी पोद्दार द्वारा प्रणीत यह अनुपम ग्रन्थ-रत्न है। इसमें श्री राधाकृष्ण का अलौकिक प्रेम ही श्रीराधामाधव-चिन्तनके रूप में प्रस्फुटित है। भक्ति और शास्त्रीय चिन्तन के अद्भुत समन्वय के साथ यह ग्रन्थ-रत्न सात प्रकरणों में विभक्त है। श्रीराधा, श्रीकृष्ण, श्रीराधामाधव, भावराज्य-लीला-रहस्य, प्रेम-तत्त्व, गोपाङ्गना और प्रकीर्ण-ये सातों प्रकरण मुक्ति के सप्त सोपान के रूप में भगवत्-तत्त्वका सरस, हृदयग्राही प्रतिपादन करते हैं। यह ग्रन्थ साधकों, श्रद्धालुओं, व्रज-रस-रसिकों के लिये नित्य स्वाध्याय एवं संग्रहका विषय है। सचित्र, सजिल्द।

"The treatise authored by Hanumanprasad poddar occupies a foremost place in literature on devotion. The transcendental love between Radha-Krishna has been depicted in this book. Amalgamating devotion and philosophical thinking the book has been divided in seven. Chapters viz; Sri Radha, Sri Krishna, Sri Radhamadhava, secret of divine sport, essence of love, cowherd lasses and miscellaneous. All the seven chapters are the seven gateways to salvation. The book has been a means of inspiration for the strivers, ardent devotees, persons interested in literatures of Vraj etc. Book is in hard cover and with illustration."

Additional Information

Additional Information

Book Code 0049
Pages 960
Language हिन्दी, Hindi
Author हनुमानप्रसाद पोद्दार, Hanumanprasad poddar
Size (cms.) 14.0 x 21.5