पद-रत्नाकर (Pad-Ratnakar)

पद-रत्नाकर (Pad-Ratnakar)
₹110.00
Book Code: 0050
प्रस्तुत पुस्तक भक्तहृदय पूज्य श्री भाईजी के द्वारा प्रणीत भक्ति-साहित्य के 1565 गेय पदोंका अनुपम संग्रह है। इन पदों में भगवान श्रीकृष्ण की मधुर लीलाओं के चित्रण के साथ ज्ञान, वैराग्य, चेतावनी आदि अनेक विषयों पर सरल काव्यात्मक प्रकाश डाला गया है।
Description

Details

प्रस्तुत पुस्तक भक्तहृदय पूज्य श्री भाईजी के द्वारा प्रणीत भक्ति-साहित्य के 1565 गेय पदोंका अनुपम संग्रह है। इन पदों में भगवान श्रीकृष्ण की मधुर लीलाओं के चित्रण के साथ ज्ञान, वैराग्य, चेतावनी आदि अनेक विषयों पर सरल काव्यात्मक प्रकाश डाला गया है। सचित्र, सजिल्द।

The book is a beautiful collection of verses 1565 in number fit to be sung melodiously composed by Hanumanprasad Poddar a devotee poet. The verses are full of picturesque depiction of childly pranks of Lord Sri Krishna along with other subjects such as knowledge, dispassion, warning, norms to be followed in one's life etc. The book is hard bound with illustrations.

Additional Information

Additional Information

Book Code 0050
Pages 976
Language हिन्दी, Hindi
Author हनुमान प्रसाद पोद्दार, Hanuman Prasad Poddar
Size (cms.) 14.0 x 21.5