सच्चे हृदय से भगवच्छरणागति की स्वीकृति हो जाने पर चिन्ता, भय, शोक आदि दोषों का अपने-आप उपशमन हो जाता है। इस दिव्य भाव को दृढ़ कराने वाला स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज कृत एक सुन्दर विवेचन
सच्चे हृदय से भगवच्छरणागति की स्वीकृति हो जाने पर चिन्ता, भय, शोक आदि दोषों का अपने-आप उपशमन हो जाता है। इस दिव्य भाव को दृढ़ कराने वाला स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज कृत एक सुन्दर विवेचन