श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण, केवल हिन्दी (Shrimadvalmikiya Ramayan, Only Hindi)

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण, केवल हिन्दी (Shrimadvalmikiya Ramayan, Only Hindi)
₹280.00
Book Code: 0077
श्रीमद्रामायण को वेदतुल्य प्रतिष्ठा प्राप्त है। धराधाम का आदिकाव्य का होने से इस में भगवान के लोकपावन चरित्र की सर्वप्रथम वाङ्मयी परिक्रमा है। इसके एक-एक श्लोक में भगवान के दिव्य गुण, सत्य, सौहार्द्र, दया, क्षमा, मृदुता, धीरता, गम्भीरता, ज्ञान, पराक्रम, प्रज्ञा-रंजकता, गुरुभक्ति, मैत्री, करुणा, शरणागत-वत्सलता जैसे अनन्त पुष्पों की दिव्य सुगन्ध है। हिन्दी, सचित्र, सजिल्द।
Description

Details

त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि के श्रीमुख से साक्षात वेदों का ही श्रीमद्रामायण रूप में प्राकट्य हुआ, ऐसी आस्तिक जगत की मान्यता है। अतः श्रीमद्रामायण को वेदतुल्य प्रतिष्ठा प्राप्त है। धराधाम का आदिकाव्य का होने से इस में भगवान के लोकपावन चरित्र की सर्वप्रथम वाङ्मयी परिक्रमा है। इसके एक-एक श्लोक में भगवान के दिव्य गुण, सत्य, सौहार्द्र, दया, क्षमा, मृदुता, धीरता, गम्भीरता, ज्ञान, पराक्रम, प्रज्ञा-रंजकता, गुरुभक्ति, मैत्री, करुणा, शरणागत-वत्सलता-जैसे अनन्त पुष्पों की दिव्य सुगन्ध है। हिन्दी , सचित्र, सजिल्द।

Valmiki Ramayan is one of the world's most remarkable classics and excels in its moral appeal. It is full of lessons for all and deserves to be read with interest by all lovers of healthy literature. It is noted for its poetic excellence and is the oldest specimen of epic poetry. It stands equal in rank to the Vedas. Hindi. Hard-bound with illustration.

Additional Information

Additional Information

Book Code 0077
Pages 1056
Language हिन्दी, Hindi, संस्कृत, Sanskrit
Author महर्षि वाल्मीकि, Maharshi Valmiki
Size (cms.) 19.0 x 28.0