श्रीमद्भगवद्गीता तत्त्वविवेचनी, बृहदाकार (Shrimad-Bhagvad-Gita Tattva-Vivechani, King Size)

श्रीमद्भगवद्गीता तत्त्वविवेचनी, बृहदाकार (Shrimad-Bhagvad-Gita Tattva-Vivechani, King Size)
₹250.00
Book Code: 0001
इस पुस्तक में श्रीजयदयालजी गोयन्दका द्वारा प्रणीत श्रीमद्भगवद्गीता की दिव्य टीका है। इसमे 2515 प्रश्न और उनके उत्तर के रूप में प्रश्नोत्तर शैली में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लेकों की विस्तृत व्याख्या करी गयी है। यह पुस्तक हिन्दी टीका के साथ, जिल्द सहित, रगीन चित्रों सहित, वृहदाकार रूप में उपलब्ध है।
Description

Details

भगवान श्रीकृष्ण की दिव्यवाणी से निःसृत सर्वशास्त्रमयी गीता की विश्वमान्य महत्ता को दृष्टि में रखकर इस अमर संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से गीताप्रेस के आदि संस्थापक परम श्रद्धेय ब्रम्हलीन श्रीजयदयालजी गोयन्दका द्वारा प्रणीत गीता की एक दिव्य टीका। इसमे 2515 प्रश्न और उनके उत्तर के रूप में प्रश्नोत्तर शैली में गीता के श्लेकों की विस्तृत व्याख्या के साथ अनेक गूढ़ रहस्यों का सरल, सुबोध भाषा में सुन्दर प्रतिपादन किया गया है। इसके स्वाध्याय से सामान्य-से-सामान्य व्यक्ति भी गीता के रहस्यों को आसानी से हृदयंगम कर अपने जीवन को धन्य कर सकता है।

A magnificent commentary on Gita, the song celestial, by Brahmalina Sri Jaydayal Goyandka, the founder of Gita Press, with a view to propagate the divine preaching of Lord Krishna to each and every person. Gita has emanated from the lotus-like lips of the Lord himself. As a book of scripture, the Bhagavadgita has assumed a position of universal interest. The commentary consists of 2515 questions and answers thereof. The descriptive explanation of Slokas of Gita, full of its deepest mystery, has been given in a simple language. By studying it carefully even ordinary persons are able to understand easily the deepest mystery of the Gita. By holding its essence into their heart they can make their lives meaningful.

Additional Information

Additional Information

Book Code 0001
Pages 776
Language हिन्दी, Hindi
Author जयदयाल गोयन्दका, Jayadayal Goyandka
Size (cms.) 28.0 x 37.5