मानस-रहस्य (Manas-Rahasya)

मानस-रहस्य (Manas-Rahasya)
₹60.00
Book Code: 0103
यह पुस्तक वैकुण्ठवासी श्री जयरामदास जी (दीन) के कल्याण के विभिन्न अंकों में पूर्व प्रकाशित श्रीरामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का 35 लेखों का अनुपम संकलन है। इसमें रामावतार का रहस्य, कलियुग का पुण्यप्रताप, सीतातत्व, श्रीभरतयश-चन्द्र आदि प्रसंगों का अत्यन्त सुन्दर विवेचन किया गया है।
Description

Details

यह पुस्तक वैकुण्ठवासी श्री जयरामदास जी (दीन) के कल्याण के विभिन्न अंकों में पूर्व प्रकाशित श्रीरामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का 35 लेखों का अनुपम संकलन है। इसमें रामावतार का रहस्य, कलियुग का पुण्यप्रताप, सीतातत्व, श्रीभरतयश-चन्द्र आदि प्रसंगों का अत्यन्त सुन्दर विवेचन किया गया है।

This book is a unique collection of 35 articles on different subjects priorly published in Kalyana by the late Sri Jayaramadasa (Dina). The writer has described in this book the purpose of Rama's incarnation, virtuous glory of Kaliyuga, glory of Sita, and the topic like virtuous characteristics of Bharata etc.

Additional Information

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Book Code 0103
Pages 400
Language हिन्दी, Hindi
Author जयरामदास दीन, Jayaramdas Deen
Size (cms.) 14.0 x 21.5