देवर्षि नारद (Devarshi Narad)

देवर्षि नारद (Devarshi Narad)
₹20.00
Book Code: 0751
प्रस्तुत पुस्तक में देवर्षि नारद के जन्म-कर्म का विस्तृत परिचय दिया गया है। पुस्तकाकार।
Description

Details

नित्य परिव्राजक देवर्षि नारद का कार्य अपनी वीणा की मनोहर झंकार के साथ भगवद्गुणों का गान तथा लोगों में भगवद्भक्ति का प्रचार है। ये द्वादश भागवतों में प्रमुख हैं। प्रस्तुत पुस्तक में इनके जन्म-कर्म का विस्तृत परिचय दिया गया है। भक्ति के परमाचार्य देवर्षि नारद के चरित्र के पठन-पाठन से मन में सात्त्विक भावों के सहज सञ्चार के साथ भगवद्भक्ति का विकास होता है। Devarshi Narad, the wanderer in all the three worlds, is always on move chanting the divine name and virtuous attributes of Lord. The main purpose of his wandering with a lute in hand is to propagate virtuous merits amongst the devotees. He stands foremost among the twelve Bhagvatas. Reading of this book enhances good thoughts and devotion towards the Lord in the minds of devotees.
Additional Information

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Book Code 0751
Pages 160
Language हिन्दी, Hindi
Author द्वारिका प्रसाद शर्मा (Dwarika Prasad Sharma)
Size (cms.) 13.3 x 20.3