विरह-पदावली (Virah-Padavali)

विरह-पदावली (Virah-Padavali)
₹30.00
Book Code: 0547
इस पुस्तकमें श्री सूरदास जी के द्वारा विरचित गोपी-विरह-सम्बन्धी 325 पदों का संग्रह है। इसमें अक्रूर जी के साथ श्रीकृष्ण के मथुरागमन के समय यशोदा एवं गोपियों की विरह-दशा का बड़ा ही मर्मस्पर्शी चित्रण किया गया है।
Description

Details

इस पुस्तकमें श्री सूरदास जी के द्वारा विरचित गोपी-विरह-सम्बन्धी 325 पदों का संग्रह है। इसमें अक्रूर जी के साथ श्रीकृष्ण के मथुरागमन के समय यशोदा एवं गोपियों की विरह-दशा का बड़ा ही मर्मस्पर्शी चित्रण किया गया है।

The book consists of 325 poems describing heart-touching separation of Gopis. A heart rending vivid description regarding separation of Gopis and Yashoda, the foster Mother of Krishna, at the time of departure of Krishna along with Akrura to Mathura.

Additional Information

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Book Code 0547
Pages 198
Language हिन्दी, Hindi
Author सूरदास, Soordas
Size (cms.) 13.3 x 20.3