विवेक चूडामणि (Vivek Chudamani)

विवेक चूडामणि (Vivek Chudamani)
₹20.00
Book Code: 0133
भगवान् शंकराचार्य के द्वारा विरचित ग्रन्थों में विवेक-चूड़ामणि का विशेष स्थान है। इसमें ब्रह्मनिष्ठा का महत्त्व, ज्ञानोपलब्धि का उपाय, प्रश्न-निरूपण, आत्मज्ञान का महत्त्व, पञ्चप्राण, आत्म-निरूपण, मुक्ति कैसे होगी? आत्मज्ञान का फल आदि तत्त्वज्ञान के विभिन्न विषयों का अत्यन्त सुन्दर निरूपण किया गया है।
Description

Details

भगवान् शंकराचार्य के द्वारा विरचित ग्रन्थों में विवेक-चूड़ामणि का विशेष स्थान है। इसमें ब्रह्मनिष्ठा का महत्त्व, ज्ञानोपलब्धि का उपाय, प्रश्न-निरूपण, आत्मज्ञान का महत्त्व, पञ्चप्राण, आत्म-निरूपण, मुक्ति कैसे होगी? आत्मज्ञान का फल आदि तत्त्वज्ञान के विभिन्न विषयों का अत्यन्त सुन्दर निरूपण किया गया है।

Vivek-Chudamani occupies an important place among the books authored by Lord Shankaracharya. In this book a beautiful description has been given on various subject matters such as importance of faith in Brahma, means of obtaining knowledge, propounding of question, importance of self-knowledge, five Pranas, propounding of self, how to attain salvation etc.

Additional Information

Additional Information

Book Code 0133
Pages 160
Language हिन्दी, Hindi, संस्कृत, Sanskrit
Author शंकराचार्य, Shankaracharya
Size (cms.) 13.3 x 20.3